आज में अपनी खामोशियों से डरता हूँ
फिर दोनों हाथ खाली है मेरे
दिल के ज़ज्बात भारी है मेरे
इनको संभालना अब मेरे बस की बात नहीं
इतने सारे गमो को दिल का कौन सा कोना दूं
इन गमो को आखिर कौन सा भरोसा दूं
चाहते हैं ये भी बहार आना
गिर न जाए ये आंसू
शायद इसलिए डरता हूँ
आज में अपनी खामोशियों से डरता हूँ ...
~M.J
